तसनीम समाचार एजेन्सी के अनुसार ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान के कमांडर जनरल सलामी ने कहा कि हालिया उपद्रव के दौरान शत्रु ने अपने अनुभवों को प्रयोग करते हुए सारी संभावनाओं का इस्तेमाल किया किंतु इसके बावजूद उनको पराजय हाथ लगी।
उन्होंने कहा कि ईरान को अगर पहले से अनुभव न होता तो हो सकता है कि कुछ परेशानी आती। जनरल सलामी ने कहा कि अब दुश्मनों के भीतर ही मतभेद फैल चुका है। वे एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं और पराजित होने के कारण बहुत ग़ुस्से में हैं।
याद रहे कि महसा अमीनी नामक युवती की मौत को बहाना बनाकर ईरान के शत्रुओं ने देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। उन्होंने हालिया अशांति का दुरूपयोग करते हुए उसे उपद्रव में परिवर्तित कर दिया।
इस उपद्रव में अमरीका और कुछ यूरोपीय देशों के नेताओं ने बढ-चढकर भाग लिया। उन्होंने ईरानी राष्ट्र के समर्थन की आड़ में उपद्रवियों का समर्थन किया और देश की शांति एवं सुरक्षा को बिगाड़ने का भरसक प्रयास किया।
हालिया दिनों में ईरान के कई शहरों में उपद्रवियों की ओर से मचाए गए उत्पात के ख़िलाफ़ देश की जनता ने महारैली निकाली। देशव्यापी इस महारैली में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
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